ठंड के मौसम में सावधानी लेना बहुद जरुरी है।  बिसेस करके बच्चा और ज्यादा उमर होने वोला के लिया ठंड के मौसम में दिक्कद हो सकती है। देश के सभी हिस्सों में तापमान बढ़ जाने के बाद है। इस मौसम में, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

बच्चों और बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित रोगियों को भी इस मौसम में विशेष ध्यान रखना चाहिए। ठंड के मौसम में हृदय रोगियों को यह सावधानी लेना चाहिए। ठंड के मौसम में हृदय रोगियों को जरूर साबधानी लेना चाहिये जो आप आपने घर में बैठ के भी कर सकते है।

 

ठंड के मौसम में,सर्दी के मौसम

 

  • ठंड की शुरुआत के साथ दिल की समस्याओं के साथ अस्पतालों में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन हम इस सर्दी के मौसम में थोड़ा बहुद आपने ख्याल करते तो जरूर परिसान आने से आप बच सकते हो। ठंड सबसे पहले हमारे शरीर के बाहरी हिस्से त्वचा को प्रभावित करती है। फिर ठंड त्वचा के माध्यम से प्रवेश करती है और त्वचा से जुड़ी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है।

 

  • जब बाहरी शिरा से रक्त आंतरिक शिरा में प्रवेश करता है, तो इसका दबाव बढ़ जाता है। आंतरिक नस रक्त के शरीर की तरह होती है और इसका सीधा असर हृदय पर होता है। दिल की धमनियां काम नहीं कर सकती हैं। जैसे-जैसे हृदय में रक्त का प्रवाह असंतुलित होता है, तब रक्तचाप बढ़ाने का काम करता है।

  • इतना ही नहीं ठंड के मौसम में रक्त के थक्के जमने की संभावना होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब तापमान बढ़ता है तो प्रोटीन का स्तर जो रक्त को थक्का (कोर्टिसोल) में मदद करता है।  वह भी बढ़ जाता है। शरीर में गर्मी की मात्रा को समायोजित करने के लिए हृदय अधिक सक्रिय होना चाहिए। इससे दबाव भी बढ़ता है।

 

  • सर्दियों के दौरान न केवल रक्त का थक्का बनता है बल्कि यह धमनियों को भी सख्त कर देता है। कभी-कभी यह रक्त प्रवाह में बाधा का कारण बनता है। इससे रक्तचाप भी बढ़ सकता है। जब रक्त प्रवाह बाधित होता है। इससे दिल का दौरा, दिल की विफलता और स्ट्रोक हो सकता है। ठंड लगने पर स्नान करना भी नाराज़गी का कारण बन सकता है। जुकाम बच्चों में टॉन्सिलिटिस और नाराज़गी का कारण बन सकता है।

 

  • जुकाम फेफड़ों को भी प्रभावित करता है और इससे निमोनिया हो सकता है। जुकाम के कारण होने वाला निमोनिया बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए एक जोखिम कारक है। फेफड़े प्रभावित होते हैं, लेकिन कभी-कभी हृदय फेफड़ों के प्रभाव से प्रभावित हो सकता है।

ठंड के मौसम में हृदय रोगियों को कुछ सावधानी लेना जरुरी है ठंड के कारण हर दिन दिल की समस्याएं मौत का एक प्रमुख कारण हो सकती हैं। यह तब होता है जब हृदय में रक्त का प्रवाह असंतुलित होता है। इसलिए सर्दियों के दौरान हृदय रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों द्वारा विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

 

 

सर्दी के मौसम में हृदय रोगियों को क्या सावधानी लेना चाहिय 

  • सर्दी के दिनों में हार्ट के मरीज मॉर्निंग वॉक पर न जाएं।
  •  हृदय रोगियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच जरुरी है।
  • अगर आपको व्यायाम करना है तो घर के अंदर ही करें।
  •  मोटे मोजे पहनें क्योंकि यह ठंडे पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
  •  ठंड में छाती और फेफड़ों में जाने से रोकने के लिए गर्म कपड़े पहन जरुरी है।
  •  जब पैर ठंडे होते तो शरीर गरम  नहीं होता है,  तो पैरों को गर्म रखने के कोसिस करें
  •  पैर गरम नहीं हुवा तो गर्म पानी में पैर राखो  गर्म पानी की थैली से पैर को गर्म करो।
  •  तेल गर्म करके पैरों पर विशेष मालिश करसकते हो।
  •  सुबह की धूप में अपनी पीठ पर धुप में  बैठें
  •  शरीर पर मोटे कपड़े पहनना जरुरी है।
  •  लिविंग रूम में वेंटिलेशन रखकर हीटर को गर्म किया जा सकता है।

 

 

ठंड के मौसम में क्या खाना चाहिए।

 

सर्दी के मौसम में क्या खाना चाहिए क्या खाने से अच्छी हो सकता है।

  • – ठंड का मौसम में गर्म सूप का सेवन ज्याद करें
  • – गर्म पानी का सेवन ज्याद करें
  • – कलौचिया  भी शरीर के लिए अच्छा होता है।
  • – आप जावानो सूप भी बना सकते हैं ठंड का मौसम में और इसे खा सकते हैं
  • -ठंड का मौसम में गंड्रुक सूप, सोयाबीन और तले हुए मकई भोजन भी सर्दियों में बहुत फायदेमंद होते हैं। दिल के मरीज मछली और मुर्गी खा सकते हैं।
  • – लहसुन और अदरक भी फायदेमंद हैं ठंड का मौसम में।

फिर भी यदि बच्चों और बुजुर्गों में दिल की समस्याएं दिखाई देने लगती हैं तो उन्हें तुरंत अस्पताल जाना चाहिए और डॉक्टर को देखना चाहिए। यदि समय पर सही उपचार नहीं दिया गया तो ठंड को जल्दी मरने में देर नहीं लगेगी।

ठंड के मौसम में हृदय रोगियों को ज्याद सावधानी लेना चाहिए। आपन ख्याल करो और दूसरे के साथ भी ज्ञान सेयर जरूर करो ठंड के मौसम में हृदय रोगियों को यह सावधानी लेना चाहिए।

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